एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में
एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी
Occassional Poetry
एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी
मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ मगर वो लम्हा जब मैं सिर्फ़ अपना हो सा
तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा, गुज़र ही
वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं जो इश्क़ में तालिब नहीं मतलूब रहे हैं, तूफ़ान
सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें किस के घर जाएँ कि इस वादा शिकन को
बेकसी हद से जब गुज़र जाए कोई ऐ दिल जिए की मर जाए, ज़िंदगी से कहो दुल्हन बन
मौज ए गुल मौज ए सबा मौज ए सहर लगती है सर से पा तक वो समाँ है
मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया जितने भी बदनाम हुए हम उतना उसने
दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा लाख पर्दों में छुपा कोई सँवरता ही रहा, रौशनी
लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम लाश ये किस की लिए फिरते हैं इन हाथों पे