कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो

kanval jo wo kanaar e aabjoo na ho

कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो किसी भी अप्सरा से गुफ़्तुगू न हो, क़ज़ा हुआ है

दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं

dil yaar ka takht hua hi nahin

दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं जीवन ख़ुश बख़्त हुआ ही नहीं, इसे तोड़ना भी तो नर्मी

सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में

siskiyon hichkiyon aahon kee farawani me

सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में उलझनें कितनी हैं इस इश्क़ की आसानी में, ये तेरे बालों का

ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं

ye tere husn ka aaveza jo mahtab nahin

ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं का’बा ए इश्क़ नहीं रौज़ा ए यक ख़्वाब नहीं, एक

सर को आवाज़ से वहशत ही सही

sar ko aawaz se wahshat hi sahi

सर को आवाज़ से वहशत ही सही और वहशत में अज़िय्यत ही सही, ख़ाक ज़ादी तेरे उश्शाक़ बहुत

लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से

lahoo rago me sambhaala nahi gaya mujh se

लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों

लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं

lahoo me rang e sukhan us ka bhar ke dekhte hain

लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं चराग़ बाम से जिस को उतर के

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे 

khyaal tha ki tujhe paa ke khud ko dhoondhenge

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था

aakhir gam e jaanaan ko ae dil badh kar gam e dauraan hona tha

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना

जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते

jo samjhaate bhi aa kar vaaieez e barham to kya karte

जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ