जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग

jaise koi rabt nahi ho jaise ho anjane log

जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग क्या से क्या हो जाते हैं अक्सर जाने पहचाने

दिल में मेरे अरमान बहुत हैं

dil me mere arman bahut hain

दिल में मेरे अरमान बहुत हैं इस घर में मेहमान बहुत हैं, आप ज़माने को क्या जानें आप

ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना

khud apni zillat o khwaree na karna

ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना किसी कमज़र्फ़ से यारी न करना, अगर तुम शाद रहना चाहते

क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है

kya kahe ye jabr kaisa zindagi ke sath

क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है हम किसी के साथ हैं और दिल किसी के

खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें

khula hai jhooth ka bazaar aao sach bole

खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें, सुकूत छाया

हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता

hath ankhon pe rakh lene se khatra nahi jata

हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता दीवार से भौंचाल को रोका नहीं जाता, दावों की

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं

kis taraf qaafila jana hai kahan dekhte hai

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं हम तो बस आप के पैरों के निशाँ देखते हैं,

दिल इतना खो गया आराइशों में

dil itna kho gaya aaraaeesho me

दिल इतना खो गया आराइशों में तेरी ख़्वाहिश नहीं है ख़्वाहिशों में, तेरी यादें हैं और आँसू हमारे

वो संगदिल तो फ़क़त देखने से टूट गए

wo sangdil to faqat dekhne se toot gaye

वो संगदिल तो फ़क़त देखने से टूट गए ये देखने में हमारे पसीने छूट गए, उन्हें हमारे सिवा

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी

karta hai koi ab bhi pazeeraaee humari

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी रुस्वाई भी लगती नहीं रुस्वाई हमारी, हम देख के दुनिया भी