अजब वायज़ की दींदारी है या रब !

azab wayaz ki deedari hai ya rab

अजब वायज़ की दींदारी है या रब ! अदावत है इसे सारे जहाँ से, कोईअब तक न यह

दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही…

darog ke imtihan kade me sada yahi

दरोग़ के इम्तिहाँ कदे में सदा यही कारोबार होगा जो बढ़ के ताईद ए हक़ करेगा वही सज़ावार

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस

milna na milna ek bahana hai aur bas

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस,

सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

sukhan vari ka bahana banaata rahta hoon

सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से

जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी…

jisko gurur aaj hai yaa taajwari ka

जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताजवरी का कल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी का,

पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था

pee li to kuch pata na chala wo surur tha

पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था वो उस का साया था कि वही रश्क

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद्द हमारी है

ye hai to sab ke liye ho ye zidd hamari hai

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद्द हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग

अज़ब कर्ब में गुज़री, जहाँ जहाँ गुज़री

azab karb me guzari jahan jahan guzri

अज़ब कर्ब में गुज़री, जहाँ जहाँ गुज़री अगरचे चाहने वालों के दरम्याँ गुज़री, तमाम उम्र चराग ए उम्मीद

खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो

khanzar se karo baat na talwar se pucho

खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो मैं क़त्ल हुआ कैसे मेरे यार से पूछो, फर्ज़ अपना

नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है…

naam likhte hai tera aur mita dete hai

नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है यूँ इस दिल को मुहब्बत की सज़ा देते है, उम्र