एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ

ek vazeefa hai kisi dard ka dohraya hua

एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ जिस की ज़द में है पहाड़ों का धुआँ आया हुआ,

अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है

adaa hai khwab hai taskeen hai tamaasha hai

अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बे तहाशा है, ज़रा सी

अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना

ab tum ko hi savan ka sandesa nahi banana

अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना मुझ को भी किसी और का रस्ता नहीं बनना,

आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो

aaraaesh e khyal bhi ho dilkusha bhi ho

आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो वो दर्द अब कहाँ जिसे जी चाहता भी हो, ये

किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे

kisi kali ne bhi dekha na aankh bhar ke mujhe

किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे गुज़र गई जरस ए गुल उदास कर के

तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई

teri zulfon ke bikharne ka sabab hai koi

तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई, आँच

वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे

wo is adaa se jo aaye to kyun bhala na lage

वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न

जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया

jab raat gaye teri yaad aayi sau tarah se jee ko bahalaya

जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया कभी अपने ही दिल से बातें

तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई

tere khyal se lau de uthi hai tanhaai

तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई शब ए फ़िराक़ है या तेरी जल्वा आराई, तू किस

कौन उस राह से गुज़रता है

kaun us raah se guzarta hai

कौन उस राह से गुज़रता है दिल यूँही इंतिज़ार करता है, देख कर भी न देखने वाले दिल