चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ

chashm dekhoon na main us kee na hee abroo dekhoon

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ फिर वो क्या शय है जिसे दुनिया में

शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम

sharmindagi me umr basar kar rahe hai hum

शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम ये काम था तुम्हारा मगर कर रहे हैं हम, पीना

हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए

hum ek roz us ko bhulaane nikal gaye

हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए जब आए लौट कर तो ज़माने निकल गए, एक शख़्स

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की

rah rah ke yaad aati hai us sharmsaar kee

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की बे इख़्तियारी देख मेरे इख़्तियार की, डर है कि

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद

dil kisi ka na hua ek kharidar ke baad

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद यहाँ लोग बाज़ार लगा लेते हैं बाज़ार के बाद,

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले

tu mujhe yaad kare aisa tariqa nikale

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले मेरी यकतरफ़ा मोहब्बत का नतीजा निकले, तेरी आँखों में दिखाई दे

मेरी सारी ज़िंदगी को बे समर उस ने किया

meri saari zindagi ko be asar us ne kiya

मेरी सारी ज़िंदगी को बे समर उस ने किया उम्र मेरी थी मगर उस को बसर उस ने

पा ब गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन

paa ba gil sab hai rihaayee kee kare tadbeer kaun

पा ब गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन दस्त बस्ता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन

बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया

bazm e takallufaat sajaane me rah gaya

बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया मैं ज़िंदगी के नाज़ उठाने में रह गया, तासीर के लिए

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा

ye mohabbat ka fasana bhi badal jayega

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा, आज कल में कोई