वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है
वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम
General Poetry
वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम
सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है,
हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही
क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस और कुछ मद्द ए नज़र है अपनी रुस्वाई कि
कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के,
सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही
मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के
नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची ज़मीं का तज़्किरा था आसमाँ तक बात
तरह तरह के सवालात करते रहते हैं अब अपने आप से हम बात करते रहते हैं, अता हुई
जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं,