वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है

wo hans dete hai jab mahfil me mera naam aata hai

वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है

suna hai jab se ki tum ko bhi gam gavara hai

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है,

हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है

hum ahal e dil ka samajhiye qarar baaqee hai

हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही

क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस

kya abhi kahiyega mujh ko apna saudaai ki bas

क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस और कुछ मद्द ए नज़र है अपनी रुस्वाई कि

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के

kal tak ye phool rooh e ravan the bahar ke

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के,

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ

sab ko malum hai ye baat kahan

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे

main hazar baar chahoon ki wo muskura ke dekhe

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के

नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची

niyaz e ishq e naaz e butaan tak baat ja pahunchi

नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची ज़मीं का तज़्किरा था आसमाँ तक बात

तरह तरह के सवालात करते रहते हैं

tarah tarah ke sawalaat karte rahte hain

तरह तरह के सवालात करते रहते हैं अब अपने आप से हम बात करते रहते हैं, अता हुई

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं

jab se dil me tere bakhshe hue gam thahre hain

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं,