गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो

gaye dino ka suraag le kar kidhar se aaya kidhar gaya wo

गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो

दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया

dayar e dil kee raat me charaag saa jal gaya

दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो

दिल में एक लहर सी उठी है अभी

dil me ek lahar see uthi hai abhi

दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज

दिल धड़कने का सबब याद आया

dil dhadkane ka sabab yaad aaya

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ

निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं

niyyat e shauq bhar na jaaye kahin

निय्यत ए शौक़ भर न जाए कहीं तू भी दिल से उतर न जाए कहीं, आज देखा है

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ ?

naye kapde badal kar jaaoon kahan

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए ? वो शख़्स तो शहर ही

कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले

kuch is ada se gam e zindagi ke saath chale

कुछ इस अदा से ग़म ए ज़िंदगी के साथ चले कि जैसे कोई किसी अजनबी के साथ चले,

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए

aaraaeesh e bahaar ka saamaan kahan se aaye

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए

kya kya na saamne se zamane guzar gaye

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए,

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ?

kaun kahta hai ki pee kar door ho jate hai gam

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? और याद आती हैं बातें और