लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता

lahoo na ho to

लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता हमारे दौर में आँसू ज़बाँ नहीं होता, जहाँ रहेगा वहीं

किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा

kisi ke zakhm par

किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा ?

मेरी बाहों पे तेरी ज़ुल्फ़ जो लहराई है

meri baahon pe teri

मेरी बाहों पे तेरी ज़ुल्फ़ जो लहराई है मैं ये समझा कि बियाबाँ में बहार आई है नाम

मिलें हम कभी तो ऐसे कि हिजाब भूल जाए

mile ham kabhi to

मिलें हम कभी तो ऐसे कि हिजाब भूल जाए मैं सवाल भूल जाऊं तू जवाब भूल जाए, तू

तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में

tanhaai se hai sohbat

तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में क्या ख़ूब गुज़रती है औक़ात जुदाई में, रुख़्सत हो चला

अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और

ab ishq tamasha mujhe

अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और कहता हूँ कुछ और मुँह से निकल जाए है कुछ

बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं

Baithe to paas hai

बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं जी लगा है पर अभी हाथ लगा सकते नहीं,

बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता

barahm kabhi qasid se

बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता गर नाम हमारा सर ए मक्तूब न होता, ख़ूबान ए

मैं ने यूँ इन सर्द लबों को रखा…

Main ne yun in

मैं ने यूँ इन सर्द लबों को रखा उन रुख़्सारों पर जैसे कोई भूल से रख दे फूलों

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा

एक सूरज था कि

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा, किस