तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा

tamam umr azaabon ka

तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा, गुज़र ही

वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं

wo log hi har

वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं जो इश्क़ में तालिब नहीं मतलूब रहे हैं, तूफ़ान

सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें

subah ke dard ko

सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें किस के घर जाएँ कि इस वादा शिकन को

बेकसी हद से जब गुज़र जाए

bekasi had se jab

बेकसी हद से जब गुज़र जाए कोई ऐ दिल जिए की मर जाए, ज़िंदगी से कहो दुल्हन बन

मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया

muddat hui us jaan

मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया जितने भी बदनाम हुए हम उतना उसने

दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा

dida o dil me

दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा लाख पर्दों में छुपा कोई सँवरता ही रहा, रौशनी

आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर

aaye kya kya yaad

आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर उस का काग़ज़ चिपका देना घर के रौशनदानों

हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने

hausla kho na diya

हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने कितनी शिकनों को चुना तेरी जबीं से हम ने,

दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हम

dil ko har lamha

दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हम इतने मजबूर रहे हैं कभी हालात से हम, नशा

ऐ दर्द ए इश्क़ तुझ से मुकरने लगा हूँ मैं

ae dard e ishq

ऐ दर्द ए इश्क़ तुझ से मुकरने लगा हूँ मैं मुझ को संभाल हद से गुज़रने लगा हूँ