सोचते रहते हैं अक्सर रात में

sochate rahte hain aksar raat me

सोचते रहते हैं अक्सर रात में डूब क्यूँ जाते हैं मंज़र रात में ? किस ने लहराई हैं

धूप में सब रंग गहरे हो गए

dhoop me sab rang gahre ho gaye

धूप में सब रंग गहरे हो गए तितलियों के पर सुनहरे हो गए, सामने दीवार पर कुछ दाग़

कोई मौसम हो भले लगते थे

koi mausam ho bhale lagte the

कोई मौसम हो भले लगते थे दिन कहाँ इतने कड़े लगते थे ? ख़ुश तो पहले भी नहीं

कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए

kuch to is dil ko saza dee jaaye

कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए उस की तस्वीर हटा दी जाए, ढूँढने में भी मज़ा

और बाज़ार से क्या ले जाऊँ ?

aur baazar se kya le jaaoon

और बाज़ार से क्या ले जाऊँ पहली बारिश का मज़ा ले जाऊँ कुछ तो सौग़ात दूँ घर वालों

लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे

labon par yunhi see hansi bhej de

लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे मुझे मेरी पहली ख़ुशी भेज दे, अँधेरा है कैसे तेरा ख़त

नींद रातों की उड़ा देते हैं

neend raaton ki uda dete hain

नींद रातों की उड़ा देते हैं हम सितारों को दुआ देते हैं, रोज़ अच्छे नहीं लगते आँसू ख़ास

एक ख़ला अंदर उतर जाने दिया

ek khalaa andar utar jaane diya

एक ख़ला अंदर उतर जाने दिया ख़ुद को ख़ालीपन से भर जाने दिया, जान मुड़ कर देखती थी

ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए

gam ko dil ka qarar kar liya jaaye

ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए इस ख़िज़ाँ को बहार कर लिया जाए, फिर जुनूँ को

अक्स मौजूद न साया मौजूद

aqs mauzood na saya mauzood mujh me

अक्स मौजूद न साया मौजूद मुझ में अब कुछ नहीं मेरा मौजूद, निकल आता हूँ मैं अक्सर बाहर