एक वो दौर कि मिन्नतें करता था वफ़ा निभाने की

ek-wo-daur-ki-minnaten-karta-tha wafa nibhaane ki

एक वो दौर कि मिन्नतें करता था वफ़ा निभाने की एक ये वक़्त कि उसे आरज़ू है दामन

इरादा है किसी जंगल में जा रहूँगा मैं

iraada hai kisi jungle me jaa rahunga

इरादा है किसी जंगल में जा रहूँगा मैं तुम्हारा नाम हर एक पेड़ पर लिखूँगा मैं, हर एक

शगुन ले कर न क्यूँ घर से चला मैं

shagun le kar na kyun ghar se chala main

शगुन ले कर न क्यूँ घर से चला मैं तुम्हारे शहर में तन्हा फिरा मैं, अकेला था किसे

वो मेरे साथ आने पे तैयार हो गया

wo mere saath aane pe taiyar ho gaya

वो मेरे साथ आने पे तैयार हो गया सोते से हड़बड़ा के मैं बेदार हो गया, उस के

दुख का एहसास न मारा जाए

dukh ka ehsas na maara jaaye

दुख का एहसास न मारा जाए आज जी खोल के हारा जाए, इन मकानों में कोई भूत भी

सुखाने बाल ही कोठे पे आ गए होते

sukhaane baal hi kothe pe aa gaye hote

सुखाने बाल ही कोठे पे आ गए होते इसी बहाने ज़रा मुँह दिखा गए होते, तुम्हें भी वक़्त

सच है कि वो बुरा था हर एक से लड़ा किया

sach hai ki wo bura tha

सच है कि वो बुरा था हर एक से लड़ा किया लेकिन उसे ज़लील किया ये बुरा किया,

ऐसा हुआ नहीं है पर ऐसा न हो कहीं

aisa hua nahin hai par aisa na ho

ऐसा हुआ नहीं है पर ऐसा न हो कहीं उस ने मुझे न देख के देखा न हो

तीसरी आँख खुलेगी तो दिखाई देगा

teesri aankh khulegi to dikhaai dega

तीसरी आँख खुलेगी तो दिखाई देगा और कै दिन मेरा हमज़ाद जुदाई देगा ? वो न आएगा मगर

अचानक तेरी याद का सिलसिला

achanak teri yaad ka silsila

अचानक तेरी याद का सिलसिला अँधेरे की दीवार बन के गिरा, अभी कोई साया निकल आएगा ज़रा जिस्म