रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर
रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र
Life Status
रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र
गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर, कारवाँ
मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी, ग़रीब ए
आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला न सही बाब ए क़फ़स रौज़न ए ज़िंदाँ तो
इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मिरा दिल कहा
ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है,
चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए बस एक सुकूत का आलम जिसे नवा कहिए, असीर
ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी दम के दम में अफ़्साना थी मेरी तबाही भी,
डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, शराब
अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें मौज को गेसू भँवर को चश्म ए जानाना कहें,