मुसलसल बेकली दिल को रही है

musalsal bekali dil ko rahi hai

मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है, मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा

फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए

fir sawan rut kee pawan chali tum yaad aaye

फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आए, फिर

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे

kya zamana tha ki hum roz mila karte the

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ

कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें

kuch yaadgaar e shahar e sitamgar hi le chale

कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं इस गली में तो पत्थर ही ले

वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं

wo dilnawaz hai lekin nazar shanas nahin

वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं

dil ke tatar me yaadon ke ab aahoo

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं आईना माँगे जो हम से वो परी रू

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

hum bichhad ke tum se baadal kee tarah

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते

अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो

apne ghar ke dar o deewar ko ooncha na

अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो,

ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ

gurub e shaam hi se khud ko yun mahsus

ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दिया हूँ और हवा

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

bichhadte daamno me phool kee kuch pattiyan

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक