एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिसमें

ek lamha ki mile

एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिसमें एक नुक्ता सभी हिकमत के ख़ज़ाने जिसमें, दायरा जिसमें समा जाएँ

सूखी ज़मीं को याद के बादल भिगो गए

sookhi zamin ko yaad

सूखी ज़मीं को याद के बादल भिगो गए पलकों को आज बीते हुए पल भिगो गए, आँसू फ़लक

छा गया मेरे मुक़द्दर पे अंधेरा ऐ दोस्त

chha gaya mere muqaddar

छा गया मेरे मुक़द्दर पे अंधेरा ऐ दोस्त तू ने शानों पे जो गेसू को बिखेरा ऐ दोस्त,

सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ

sadaqaton ko ye zidd

सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ जो शय कहीं न मिले मैं कहाँ तलाश करूँ ?

कैसे सुनाऊँ ग़म की कहानी साँसों पर है बार बहुत

kaise sunaaoon gam ki

कैसे सुनाऊँ ग़म की कहानी साँसों पर है बार बहुत माज़ी कहता है कह जाओ हाल को है

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है

jism ke gharaunde me

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है दिल में जब मोहब्बत की चाँदनी उतरती है, शाम के

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे

yahan jo zakhm milte

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे तुम्हारे शहर के सब लोग तो दुश्मन नहीं

दिल में एक लहर सी उठी है अभी

dil me ek lahar

दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज

घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से

ghutan bhi dekh rahi

घुटन भी देख रही है मुझे हैरानी से कहीं मैं ऊब ही जाऊँ न उस जवानी से, सज़ा

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने

is mitti ko aise

इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हम ने ख़ुद को रोज़ बिगाड़ा रोज़ बनाया हम ने, जो सोचा