कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है

kitni aasaani se duniya ki girah kholta hai

कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है मुझ में एक बच्चा बुज़ुर्गों की तरह बोलता है, क्या

इजाज़त कम थी जीने की मगर मोहलत ज़्यादा थी

izazat kam thi jine ki magar mohlat zyada

इजाज़त कम थी जीने की मगर मोहलत ज़्यादा थी हमारे पास मरने के लिए फ़ुर्सत ज़्यादा थी, तअज्जुब

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ

ye kab chaha ki mashahoor ho jaaoon

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही

घर से निकले थे हौसला कर के

ghar se nikale the hausla kar ke

घर से निकले थे हौसला कर के लौट आए ख़ुदा ख़ुदा कर के, दर्द ए दिल पाओगे वफ़ा

कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ

kuch parindo ko to bas do chaar daane chahiye

कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ कुछ को लेकिन आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ, दोस्तों का

किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता

kisi din zindagaani me karishma kyun nahi hota

किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ ज़िंदा क्यूँ नहीं

जाने कितनी उड़ान बाक़ी है

jaane kitni udaan baaqi hai

जाने कितनी उड़ान बाक़ी है इस परिंदे में जान बाक़ी है, जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है

ye jo zindagi ki kitab hai

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है कहीं एक हसीन सा ख़्वाब है

अब क्या बताएँ टूटे हैं कितने कहाँ से हम

ab kya batayen tute hai kitne kahan se hum

अब क्या बताएँ टूटे हैं कितने कहाँ से हम ख़ुद को समेटते हैं यहाँ से वहाँ से हम

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है

yahan har shakhs har pal haadsa hone se

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से