धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल…

dharti par jab khoon bahta hai badal rone lagta hai

धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम…

udasi ka ye patthar aansooon se nam nahi hota

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता, कभी

दो चार क्या हैं सारे ज़माने के बावजूद

do chaar kya hai saare zamane ke bawazood

दो चार क्या हैं सारे ज़माने के बावजूद हम मिट नहीं सकेंगे मिटाने के बावजूद, ये राज़ काश

ये नूर उतरेगा आख़िर ग़ुरूर उतरेगा

ye noor utrega aakhir gurur utrega

ये नूर उतरेगा आख़िर ग़ुरूर उतरेगा जनाब उतरेगा बंदा हुज़ूर उतरेगा, जो चढ़ गया है वो ऊपर नहीं

तबीब हो के भी दिल की दवा नहीं करते

tabib ho ke bhi dil ki dawa nahi karte

तबीब हो के भी दिल की दवा नहीं करते हम अपने ज़ख़्मों से कोई दग़ा नहीं करते, परिंदे

दो चार गाम राह को हमवार देखना

do chhar gaam raah ko hamwar dekhna

दो चार गाम राह को हमवार देखना फिर हर क़दम पे एक नई दीवार देखना, आँखों की रौशनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ

duniya ki riwayat se begana nahi hoon

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ, इस कसरत ए

यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का

yahi haal raha saaqi tere maykhano ka

यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का तो ढेर लग जाएगा टूटे हुए पैमानों का, क़हत दुनियाँ में

जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए

jung jitni ho sake dushwar honi chahiye

जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए जीत हासिल हो तो लज़्ज़तदार होनी चाहिए, एक आशिक़ कल सलामत

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है…

agarche zor hawaao ne daal rakha hai

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है मगर चराग़ ने लौ को सँभाल रखा है, मोहब्बतों में तो