अब बेवजह बेसबब दिन को रात नहीं करता

ab bewajah besabab din ko

अब बेवजह बेसबब दिन को रात नहीं करता फ़ुर्सत मिले भी तो किसी से बात नहीं करता, वक़्त,

याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए

yaad e maazi me jo khud k

याद ए माज़ी में जो आँखों को सज़ा दी जाए उस से बेहतर है कि हर बात भूला

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा

insaaf se na mahrum

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा दुनियाँ में जो जैसा करेगा, वो वैसा ही भरेगा, कागज़

ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे

khuda se waqt e dua

ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे वो बुत भी दिल को ज़रा अब संभाल कर

ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर

khoon se likhta hai taavij e azal

ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर वक़्त करता है अजब सिफली अमल काग़ज़ पर, रंज

कोई आहट कोई सरगोशी…

koi aahat koi sargoshi sada kuch bhi

कोई आहट कोई सरगोशी सदा कुछ भी नहीं घर में एक बेहिस ख़मोशी के सिवा कुछ भी नहीं,

मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं

mat bura usko kaho

मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं वो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी

ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो

zakhm e waahid ne jise

ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो हरगिज़ ना दुखाना दिल जो चोट खाया हो, जिसे

ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़

zindagaani ke kaam ek taraf

ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़ अक़द का इंतज़ाम एक तरफ़, हां मुहब्बत का नाम एक तरफ़ साज़ो सामां

रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं

rishton ke jab taar uljhane l

रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं आपस में घर बार उलझने लगते हैं, माज़ी की आँखों में