हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है..

हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है
यह पगली फिर भी अब तक ख़ुद को शहज़ादी बताती है,

कई बातें मुहब्‍बत सबको बुनियादी बताती है
जो परदादी बताती थी वही दादी बताती है,

जहाँ पिछले कई बरसों से काले नाग रहते हैं
वहाँ एक घोंसला चि‍ड़‍ियों का था दादी बताती है,

अभी तक यह इलाक़ा है रवादारी के क़ब्‍ज़े में
अभी फ़‍िरक़ापरस्‍ती कम है आबादी बताती है,

यहाँ वीरानियों की एक मुद्दत से हुकूमत है
यहाँ से नफ़रतें गुज़री है बरबादी बताती है,

लहू कैसे बहाया जाय यह लीडर बताते हैं
लहू का ज़ायक़ा कैसा है यह खादी बताती ,

ग़ुलामी ने अभी तक मुल्‍क का पीछा नहीं छोड़ा
हमें फिर क़ैद होना है ये आज़ादी बताती है,

ग़रीबी क्‍यों हमारे शहर से बाहर नहीं जाती
अमीर ए शहर के घर की हर एक शादी बताती है,

मैं उन आँखों के मयख़ाने में थोड़ी देर बैठा था
मुझे दुनिया नशे का आज तक आदी बताती है..!!

~मुनव्वर राना


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