कभी तो कपड़े सुखाने के बहाने छत पे आया कर

रोज़ाना ही धूप मायूस हो कर लौट जाया करती है
कभी तो कपड़े सुखाने के बहाने छत पे आया कर,

कब कहा कि ख़त लिख कर हाल ए दिल बयाँ कर
कम से कम एक्स पर ही दिल का हाल बताया कर,

मसरूफ़ ज़िन्दगी से थोड़ा सा तो वक़्त निकाल
कभी ऑनलाइन आकर ही दिल धड़काया कर,

कहाँ अब वक़्त है जो तुम मिलो गैलरी में आकर
कोई रील ही अपनी बना कर स्टोरी पे लगाया कर,

कभी फुर्सत मिले तो मेरी पोस्ट पे भी आ जाया कर
लाइक न सही, कम से कम कमेंट ही छोड़ जाया कर,

रुसवाई ए जहाँ के खौफ़ से ख़ुद को छुपाने वाली
कभी डीपी बदल कर अपनी झलक दिखाया कर..!!

~नवाब ए हिन्द


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