भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है

bhid me koi shanasa bhi nahi chhodti hai

भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है ज़िंदगी मुझको अकेला भी नहीं छोड़ती है, आफ़ियत का कोई