आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म

aap ki aankh se gahra hai meri rooh ka zakhm

आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म आप क्या सोच सकेंगे मेरी तन्हाई को ?

तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है

tere badan se o chhoo kar idhar bhi aaata hai

तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है मिसाल ए रंग वो झोंका नज़र भी आता

अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ

agarche main ek chattan saa aadmi raha hoon

अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ मगर तेरे बाद हौसला है कि जी रहा हूँ, वो

बहाना गरीबो को अधिकार दिलाना रहेगा

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मौसम ए सर्दी में बारिश ए ख़ास चल रहा है हमारी गलियों में मेढको का आना जाना रहेगा,