आदमी वक़्त पर गया होगा

aadmi waqt par gaya hoga

आदमी वक़्त पर गया होगा वक़्त पहले गुज़र गया होगा, वो हमारी तरफ़ न देख के भी कोई

एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है

ek hi muzda subah laati hai

एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है धूप आँगन में फैल जाती है, रंग ए मौसम है और बाद

अभी एक शोर सा उठा है कहीं

abhi ek shor saa utha hai khain

अभी एक शोर सा उठा है कहीं कोई ख़ामोश हो गया है कहीं, है कुछ ऐसा कि जैसे

शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें

sharmindagi hai hum ko bahut hum mile tumhen

शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें तुम सर ब सर ख़ुशी थे मगर ग़म मिले तुम्हें,

अपने सब यार काम कर रहे हैं

apne sab yaar kaam kar rahe hain

अपने सब यार काम कर रहे हैं और हम हैं कि नाम कर रहे हैं, तेग़बाज़ी का शौक़

ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो

ye gam kya dil ki adat hai nahi to

ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो, किसी के

गाहे गाहे बस अब यही हो क्या

gaahe gaahe bas ab yahi ho kya

गाहे गाहे बस अब यही हो क्या तुम से मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या ? मिल रही

ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम

zarre hi sahi koh se takra to gaye hum

ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम दिल ले के सर ए अर्सा ए ग़म आ

न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में

na dagmagaaye kabhi hum wafa ke raste me

न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में चराग़ हम ने जलाए हवा के रस्ते में, किसे लगाए

कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए

kaun bataye kaun sujhaye kaun se des sidhar gaye

कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए उन का रस्ता तकते तकते नैन हमारे हार गए,