ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है
ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है ये जो अंधेरा सिमट रहा है
ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है ये जो अंधेरा सिमट रहा है
हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं हम भी गए थे जी
ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए आबाद कब हुए थे कि बर्बाद हम हुए, होता
शेर होता है अब महीनों में ज़िंदगी ढल गई मशीनों में, प्यार की रौशनी नहीं मिलती उन मकानों
मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने आदमी ऐ ख़ुदा ख़ुदा न बने, मौत की दस्तरस में कब से
जागने वालो ता ब सहर ख़ामोश रहो कल क्या होगा किस को ख़बर ख़ामोश रहो, किस ने सहर
बड़े बने थे जालिब साहब पिटे सड़क के बीच गोली खाई लाठी खाई गिरे सड़क के बीच, कभी
सर ही अब फोड़िए नदामत में नींद आने लगी है फ़ुर्क़त में, हैं दलीलें तेरे ख़िलाफ़ मगर सोचता
ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं, हो रहा हूँ मैं किस तरह
दिल ने वफ़ा के नाम पर कार ए वफ़ा नहीं किया ख़ुद को हलाक कर लिया ख़ुद को