गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग
गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग दिल्ली अब के ऐसी उजड़ी घर घर फैला
Gazals
गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग दिल्ली अब के ऐसी उजड़ी घर घर फैला
भला कब मैं निशाने पर नहीं आया मेरे हाथों में पर पत्थर नहीं आया, मैं तौबा दोस्ती से
बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं पिता जी मर गए हैं तो अँगूठा काट
बे सबब ही इधर उधर जाता तुम नहीं होते तो बिखर जाता, फूल की तरह तुम अगर खिलते
ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लॉरी नहीं जाती, चली जाती है हँसने और
सब पुराने ख़याल बदलो यार वक़्त बदला है साल बदलो यार, मात हर बार थोड़ी खाऊँगा वक़्त के
कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला बरसों बे वज्ह यूँ पागल नहीं होने वाला, शर्त ये
ख़ुद को बीमार मत किया कर यार डूब कर प्यार मत किया कर यार, जब मदद चाहे कोई
इश्क़ से दिल को ऊबा देखा जिस्म का जब से सौदा देखा, भूका हम ने राजा देखा सागर
शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता मैं आतिश मुल्क से सपने में भी धोका