फ़िक्र का सब्ज़ा मिला जज़्बात की काई मिली

fiqr e sabza mila

फ़िक्र का सब्ज़ा मिला जज़्बात की काई मिली ज़ेहन के तालाब पर क्या नक़्श आराई मिली, मुतमइन होता

कर गए अश्क मेंरी आँख को जल थल क्या क्या

kar gaye ashk meri

कर गए अश्क मेंरी आँख को जल थल क्या क्या अब के बरसा है तेरी याद का बादल

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे

ghar se nikalte to

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे, इतना आसाँ

जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है

jo gul hai yaan

जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है क्या गुल है वो कि जिस के ये गुलज़ार

बाम पर आता है हमारा चाँद

baam par aata hai

बाम पर आता है हमारा चाँद आसमाँ से करे किनारा चाँद, आप ही की तलाश में साहब गर्दिशें

पहलू में बैठ कर वो पाते क्या ?

pahlu me baith kar

पहलू में बैठ कर वो पाते क्या दिल तो था ही नहीं चुराते क्या ? हिज्र में ग़म

तुम्हारे हाथ से कल हम भी रो लिए साहिब

tumhare haath se kal

तुम्हारे हाथ से कल हम भी रो लिए साहिब जिगर के दाग़ जो धोने थे धो लिए साहिब,

सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ

sab ne milaye haath

सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ कितना बड़ा मज़ाक़ हुआ रौशनी के साथ, शर्तें लगाई जाती

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है

ye hai to sab

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है इस एक बात पे दुनिया से जंग

तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में

tanhaai se hai sohbat

तन्हाई से है सोहबत दिन रात जुदाई में क्या ख़ूब गुज़रती है औक़ात जुदाई में, रुख़्सत हो चला