जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है

jism ke gharaunde me

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है दिल में जब मोहब्बत की चाँदनी उतरती है, शाम के

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे

yahan jo zakhm milte

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे तुम्हारे शहर के सब लोग तो दुश्मन नहीं

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा

agar talaash karoon koi

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा ? तुम्हें ज़रूर कोई

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

jhuki jhuki see nazar

झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं,

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

chupke chupke raat din

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है,

इतनी मुद्दत बाद मिले हो

itni muddat baad mile

इतनी मुद्दत बाद मिले हो किन सोचों में गुम फिरते हो ? इतने ख़ाइफ़ क्यूँ रहते हो ?

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया

ae mohabbat tere anjaam

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया, यूँ तो हर

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही

hum ko kis ke

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल ए यार होता

ye na thi humari

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल ए यार होता अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता, तेरे

दिल में एक लहर सी उठी है अभी

dil me ek lahar

दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज