क्या क्या लोग ख़ुशी से अपनी बिकने पर तैयार हुए

kya kya log khushi se apni bikne par

क्या क्या लोग ख़ुशी से अपनी बिकने पर तैयार हुए एक हमीं दीवाने निकले हम ही यहाँ पर

जाने क्या देखा था मैं ने ख़्वाब में

jaane kya dekha tha main ne khwab me

जाने क्या देखा था मैं ने ख़्वाब में फँस गया फिर जिस्म के गिर्दाब में, तेरा क्या तू

हर नई रुत में नया होता है मंज़र मेरा

har nayi rut me naya hota hai

हर नई रुत में नया होता है मंज़र मेरा एक पैकर में कहाँ क़ैद है पैकर मेरा, मैं

आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी

aahat pe kaan dar pe nazar is tarah

आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी एक एक पल की हम को ख़बर इस

ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगे

khat ke chhote se tarashe me nahi

ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगे ग़म ज़ियादा हैं लिफ़ाफ़े में नहीं आएँगे, हम न मजनूँ

तुम्हारा हिज्र मनाया तो मैं अकेला था

tumhara hizr manaya to main

तुम्हारा हिज्र मनाया तो मैं अकेला था जुनूँ ने हश्र उठाया तो मैं अकेला था, ये मेरी अपनी

कह गया हूँ जो मैं रवानी में

kah gaya hoon jo main

कह गया हूँ जो मैं रवानी में वो तो शामिल न था कहानी में, कोई लग़्ज़िश गुनाह तौबा

दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं

dil me ab yun tere bhule hue

दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं,

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं

tumhari yaad ke jab zakhm bharne

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं, हदीस ए यार

कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं

kab yaad me tera sath nahin

कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं सद शुक्र कि अपनी रातों में