शेर से शाइरी से डरते हैं

sher se shayari se darte hain

शेर से शाइरी से डरते हैं कम नज़र रौशनी से डरते हैं, लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं

dil ki baat labon par laa kar ab tak hum dukh sahte hain

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा

bewafa tum ko bhulaane me takalluf kaisa

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा आइना सच का दिखाने में तकल्लुफ़ कैसा तीरगी घर की मिटाने

कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से

koi sipahi nahi bach saka nishano se

कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से गली में तीर बरसते रहे मकानों से, ये बर्बादी अचानक से

तुम से पहले वो जो एक शख़्स यहाँ तख़्तनशीं था

tum se pahle wo jo ek shakhs yahan takhtnashin tha

तुम से पहले वो जो एक शख़्स यहाँ तख़्तनशीं था उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना

वो बात बात में ऐसे निशान छोड़ गया

wo baat baat me aise nishan chhod gaya

वो बात बात में ऐसे निशान छोड़ गया सुलगते दिल को चिता के समान छोड़ गया, न जाने

मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है

maayus e sham e gam tujhe is kee khabar bhi hai

मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है तारीकियों की आड़ में नूर ए सहर

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है

koi hndu koi muslim koi isaai hai

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ

जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी

jab tera huqm mila tark e muhabbat kar dee

जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी दिल मगर इस पे वो धड़का कि क़यामत कर

हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है

humne suna tha farishte jaan lete hain

हमने सुना था फ़रिश्ते जान लेते है खैर छोड़ो ! अब तो इन्सान लेते है, इश्क़ ने ऐसी