बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी
बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी गुज़र चुकी है ये फ़स्ल ए बहार हम
Sad Poetry
बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी गुज़र चुकी है ये फ़स्ल ए बहार हम
एक बोसा दीजिए मेरा ईमान लीजिए गो बुत हैं आप बहर ए ख़ुदा मान लीजिए, दिल ले के
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो
लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला फूलों के रस में चाँद की किरनें मिला के
हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल ज़िंदगी ही ज़िंदगी है आज कल, ग़म का हर
दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज
शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है, दफ़्न कर दो हमें
वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा
रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम मौसम ए गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम,
मेरे ही लहू पर गुज़र औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो, दिन