निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने

nigaah e saaqi e na meharbaan ye kya jaane

निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने कि टूट जाते हैं ख़ुद दिल के साथ पैमाने,

तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी

taqdeer ka shikwa be maanee

तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं, आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो

उठाए जा उन के सितम और जिए जा

uthaye jaa un ke sitam aur jiye jaa

उठाए जा उन के सितम और जिए जा यूँ ही मुस्कुराए जा आँसू पिए जा, यही है मोहब्बत

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें

ab ahal e dard ye jeene ka ehtimam karen

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें,

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ

dushman kee dosti hai ab ahal e watan ke saath

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे

humen shuoor e junoon hai ki jis chaman me rahen

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे,

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है

mujh se kaha jibreel e junoon ne ye bhi vahee ilaahi hai

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए

रहते थे कभी जिन के दिल में हम

rahte the kabhi jin ke dil me hum

रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे हैं उन्ही के

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते

masarraton ko ye ahal e havas na kho dete

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो

शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं

shaam e gam kee qasam aaj gamgeen hain

शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम,