एक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ

ek haveli hoon us

एक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ ख़ुद ही आँगन ख़ुद ही शजर भी हूँ, अपनी मस्ती

कुछ ज़रूरत से कम किया गया है

kuch zarurat se kam

कुछ ज़रूरत से कम किया गया है तेरे जाने का ग़म किया गया है, ता क़यामत हरे भरे

भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया

bhoola diya tha jis

भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया ग़ज़ाल देख कर वो ख़ुश ख़िराम याद आ

सब की कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़

sab ki kahani ek

सब की कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़ एक तरफ़ सैराब हैं सारे और मैं प्यासा

ज़ौक़ ए गुनाह ओ अज़्म ए पशेमाँ लिए हुए

zauq e gunah o

ज़ौक़ ए गुनाह ओ अज़्म ए पशेमाँ लिए हुए क्या क्या हुनर हैं हज़रत ए इंसाँ लिए हुए,

जुदाई रूह को जब इश्तिआल देती है

judaai rooh ko jab

जुदाई रूह को जब इश्तिआल देती है ख़ुनुक हवा भी बदन को उबाल देती है, अगर हो वक़्त

फ़िराक़ ओ हिज्र के लम्हे जो टल गए होते

firaq o hizr ke

फ़िराक़ ओ हिज्र के लम्हे जो टल गए होते हमारे ज़ेहन के ख़ाके बदल गए होते, वो मस्लहत

दिल है सहरा से कुछ उदास बहुत

dil hai sahra se

दिल है सहरा से कुछ उदास बहुत घर को वीराँ करूँ तो घास बहुत, रोब पड़ जाए इस

अब रहा क्या जो लुटाना रह गया

ab raha kya jo

अब रहा क्या जो लुटाना रह गया ज़िंदगी का एक ताना रह गया, एक तअल्लुक़ जिन से था

एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिसमें

ek lamha ki mile

एक लम्हा कि मिलें सारे ज़माने जिसमें एक नुक्ता सभी हिकमत के ख़ज़ाने जिसमें, दायरा जिसमें समा जाएँ