ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है

khanzar kee tarah boo e saman tej bahut hai

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है,

चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए

chaman hai maqtal e nagma ab aur kya kahiye

चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए बस एक सुकूत का आलम जिसे नवा कहिए, असीर

ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी

khatm shor e tufaan tha door thi siyaah bhi

ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी दम के दम में अफ़्साना थी मेरी तबाही भी,

डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को

dara ke mauj o talatum se hum nasheenon ko

डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, शराब

अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें

ahal e tufaan aaoo dil walon ka afsana kahen

अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें मौज को गेसू भँवर को चश्म ए जानाना कहें,

कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने

kahin be khyaal ho kar yunhi choo liya kisi ne

कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने कई ख़्वाब देख डाले यहाँ मेरी बे ख़ुदी

आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से

aa nikal ke maidaan me do rukhi ke khaane se

आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से काम चल नहीं सकता अब किसी बहाने से,

अल्फाज़ के झूठे बंधन में

alfaz ke jhuthe bandhan me

अल्फाज़ के झूठे बंधन में आगाज़ के गहरे परों में हर शख्स मुहब्बत करता है, हालाकिं मुहब्बत कुछ

सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं

soo e maqtal ki paye sair e chaman jaate hain

सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं अहल ए दिल जाम ब कफ़ सर ब

गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है

go raat meri subah kee marham to nahin hai

गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है सूरज से तेरा रंग ए हिना कम तो नहीं