वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना

vasl kee aakhiri manzil hai fana ho jaana

वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना तुझ से मिल कर तेरे बंदे का ख़ुदा हो जाना,

अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया

apna tumhen banana tha kah kar bana liya

अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया तर्ज़ ए वफ़ा का एक नया दफ़्तर बना लिया, दुनिया

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा

mujhe yaqeen hai koi raasta to nikalega

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा, मैं रेगज़ारों में

रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई

rassi to jal gayi magar aiethan nahi gayi

रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई चाहत तुम्हारी यूँ दम ए कुश्तन नहीं गई, तुम चाहते

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए

badh kar kisi se haath milaane nahi gaye

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए, दालान अपनी

चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे

chuna tha un kee mohabbat ne aazmaa ke mujhe

चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे सुपुर्द ए ख़ाक किया आदमी बना के मुझे, मैं

शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी

shama se ye kah rahi hai khaaq e parwana abhi

शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी रात आख़िर हो गई बाक़ी है अफ़्साना अभी,

मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा ?

mohabbat me shab e tareeq e hizraan kaun dekhega

मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा हमीं देखेंगे ये ख़्वाब ए परेशाँ कौन देखेगा ?

मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है

mohabbat ehtimam e daar bhi hai

मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है मोहब्बत मिस्र का बाज़ार भी है, मोहब्बत मुस्तक़िल आज़ार भी है ये

रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़

rukh har ek teer e nazar ka hai mere dil kee taraf

रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़ आने वाले आ रहे हैं अपनी