सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा

sahar qareeb hai taaron ka haal kya hoga

सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा अब इंतिज़ार के मारों का हाल क्या होगा ? तेरी

फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना

fasl e gul hai saza hai maykhana

फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना चल मेरे दिल खुला है मयख़ाना, शाम के वक़्त बैठने के

फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा

firoon-dhoondhta-maykada-tauba-tauba

फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा मुझे आज कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है, सलामत रहे तेरी आँखों की मस्ती

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही

kahna galat galat to chupana sahi sahi

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही, ये सुब्ह सुब्ह

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का

ada se dekh lo jaata rahe gila dil ka

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का बस एक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का,

बात साक़ी की न टाली जाएगी

baat saaqi ki na taali jayegi

बात साक़ी की न टाली जाएगी कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी, वो सँवरते हैं मुझे इस की

ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है

zamana hai ki guzra ja raha hai

ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है ये दरिया है कि बहता जा रहा है, वो उट्ठे दर्द

दिल गया दिल लगी नहीं जाती

dil gaya dil lagi nahi jaati

दिल गया दिल लगी नहीं जाती रोते रोते हँसी नहीं जाती, आँखें साक़ी की जब से देखी हैं

निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं

nigaah-barq-nahi-chehra-aftab-nahi

निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं, गुनह गुनह न रहा

देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई

dekha jo husn e yaar tabiyat machal gayi

देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई आँखों का था क़ुसूर छुरी दिल पे चल गई, हम