क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस

kya abhi kahiyega mujh ko apna saudaai ki bas

क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस और कुछ मद्द ए नज़र है अपनी रुस्वाई कि

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के

kal tak ye phool rooh e ravan the bahar ke

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के,

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ

sab ko malum hai ye baat kahan

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे

main hazar baar chahoon ki wo muskura ke dekhe

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के

नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची

niyaz e ishq e naaz e butaan tak baat ja pahunchi

नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची ज़मीं का तज़्किरा था आसमाँ तक बात

तरह तरह के सवालात करते रहते हैं

tarah tarah ke sawalaat karte rahte hain

तरह तरह के सवालात करते रहते हैं अब अपने आप से हम बात करते रहते हैं, अता हुई

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं

jab se dil me tere bakhshe hue gam thahre hain

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं,

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है

nazar me sab kee meri be khudi ka aalam hai

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है,

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत

kam mayassar ho jo hoti hai usi kee qeemat

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत,

अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब

apni aankhen hain aur tumhare khwab

अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब कितने पुर कैफ़ हैं हमारे ख़्वाब, उन के हक़ में बड़ा सहारा