अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो

apne ghar ke dar o deewar ko ooncha na

अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो,

ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ

gurub e shaam hi se khud ko yun mahsus

ग़ुरूब ए शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ कि जैसे एक दिया हूँ और हवा

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

bichhadte daamno me phool kee kuch pattiyan

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो तअल्लुक़ की गिराँबारी में थोड़ी नर्मियाँ रख दो, भटक

कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली

kabhi khirad se kabhi dil se dosti kar lee

कभी ख़िरद से कभी दिल से दोस्ती कर ली न पूछ कैसे बसर हम ने ज़िंदगी कर ली,

मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना

mujhe tum shohraton ke darmiyaan gumnam likh dena

मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना जहाँ दरिया मिले बे आब मेरा नाम लिख देना, ये

होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी

hoti hai tere naam se wahshat kabhi kabhi

होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी बरहम हुई है यूँ भी तबी’अत कभी कभी, ऐ दिल

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए

wo saahilo pe gaane wale kya hue

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए ? वो सुब्ह आते आते

गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो

gaye dino ka suraag le kar kidhar se aaya kidhar gaya wo

गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो

दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया

dayar e dil kee raat me charaag saa jal gaya

दयार ए दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो

दिल में एक लहर सी उठी है अभी

dil me ek lahar see uthi hai abhi

दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज