काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता

kaash main tujh saa bewafa hota

काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता फिर मुझे तुझ से क्या गिला होता ? इश्क़ होता है क्या

इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है

is jaada e ushshaaq kee taqdeer azab hai

इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है मुट्ठी में जहाँ पाँव में ज़ंजीर अजब है, बे वक़अत

गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब

gale se der talak lag ke royen abr o sahaab

गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब हटा दिए हैं ज़मान ओ मकाँ के हम

दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही

dast e munaeem meri mehnat ka kharidar sahi

दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही कोई दिन और मैं रुस्वा सर ए बाज़ार सही, फिर

सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी

sikhaayen dast e talab ko adaa e babakee

सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी पयाम ए ज़ेर लबी को सला ए आम करें, ग़ुलाम

वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है

wo jis pe tumhen sham e sar e rah ka gumaan hai

वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है वो शो’ला ए आवारा हमारी ही

आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में

aabla paa koi guzaara tha jo pichhle san me

आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में सुर्ख़ काँटों की बहार आई है अब के बन

जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है

junun e dil na sirf itna ki ek gul pairahan tak hai

जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है क़द ओ गेसू से अपना सिलसिला

हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए

ho jo saare dast o paa hain khoon me nahlaaye hue

हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए हम भी हैं ऐ दिल बहाराँ की

जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में

jis dam ye suna hai subh e watan mahbus fazaa e zindaan me

जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में जैसे कि सबा ऐ हम