दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई

dafaatan dil me kisi yaad ne lee angdaaee

दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई इस ख़राबे में ये दीवार कहाँ से आई ? आज

कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश

kaarwaan sust raahbar khamosh

कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश कैसे गुज़रेगा ये सफ़र ख़ामोश, तुझे कहना है कुछ मगर ख़ामोश देख और देख

ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे

ye shab ye khyaal o khwab tere

ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे क्या फूल खिले हैं मुँह अँधेरे, शोले में है एक रंग

किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है

kisi ka dard ho dil be qarar apna hai

किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है हवा कहीं की हो सीना फ़िगार अपना है, हो

इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है

in sahme hue shaharon kee fazaa kuch kahti hai

इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है कभी तुम भी सुनो ये धरती क्या कुछ कहती

जब ज़रा तेज़ हवा होती है

jab zara tez hawa hoti hai

जब ज़रा तेज़ हवा होती है कैसी सुनसान फ़ज़ा होती है, हम ने देखे हैं वो सन्नाटे भी

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा

sar me jab ishq ka sauda na raha

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा क्या कहें ज़ीस्त में क्या क्या न रहा, अब तो

कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत

kal jinehn zindagi thee raas bahut

कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत आज देखा उन्हें उदास बहुत, रफ़्तगाँ का निशाँ नहीं मिलता एक रही

दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे

dard kam hone laga aao ki kuch raat kate

दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे ग़म की मीआ’द बढ़ा जाओ कि कुछ रात कटे,

यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए

yun tere husn kee tasveer gazal me aaye

यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए जैसे बिल्क़ीस सुलेमाँ के महल में आए, जब्र से एक