कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा

कभी नज़रे मिला के

कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा कभी हँस के तो कभी मुस्कुरा के लूटा, मौज ए

धूप सरों पर और दामन में साया है

धूप सरों पर और

धूप सरों पर और दामन में साया है सुन तो सही जो पेड़ो ने फ़रमाया है, कैसे कह

ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है

ये बात फिर मुझे

ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है अज़ल से मेरे तआ’क़ुब में मेरा साया है, बुलंद होती

जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब

जाने कब किस के

जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब मेरी मुट्ठी में है दरिया साग़र ओ

ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था

ठीक है कि ये

ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था पर किसे यूँ नाज़ कल तक चाक दामानी

दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है

दिल मेरा रक़्साँ है

दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है लर्ज़िश ए पा आसमाँ या ये जहाँ

जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है

जाने क्यूँ बर्बाद होना

जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है सूरत ए फ़रहाद होना चाहता है, ज़ेहन से आख़िर में अब थक

मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे

मैं न कहता था

मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे सोंधी मिट्टी ही में होती है वफ़ा

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो

मेरे लबों पे उसी

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो जो चाहता है मेरे सामने गिलास न हो, ये

जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी

जब मेरे होंठों पे

जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी तेरी आँखों में भी थोड़ी सी नमी रह जाएगी, सरफिरा