नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है

nazar me sab kee meri be khudi ka aalam hai

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है,

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत

kam mayassar ho jo hoti hai usi kee qeemat

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत,

अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब

apni aankhen hain aur tumhare khwab

अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब कितने पुर कैफ़ हैं हमारे ख़्वाब, उन के हक़ में बड़ा सहारा

जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग

jaise koi rabt nahi ho jaise ho anjane log

जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग क्या से क्या हो जाते हैं अक्सर जाने पहचाने

दिल में मेरे अरमान बहुत हैं

dil me mere arman bahut hain

दिल में मेरे अरमान बहुत हैं इस घर में मेहमान बहुत हैं, आप ज़माने को क्या जानें आप

ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना

khud apni zillat o khwaree na karna

ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना किसी कमज़र्फ़ से यारी न करना, अगर तुम शाद रहना चाहते

क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है

kya kahe ye jabr kaisa zindagi ke sath

क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है हम किसी के साथ हैं और दिल किसी के

खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें

khula hai jhooth ka bazaar aao sach bole

खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें, सुकूत छाया

हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता

hath ankhon pe rakh lene se khatra nahi jata

हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता दीवार से भौंचाल को रोका नहीं जाता, दावों की

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं

kis taraf qaafila jana hai kahan dekhte hai

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं हम तो बस आप के पैरों के निशाँ देखते हैं,