नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से
नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से गुज़रना नहीं अब तुम्हारी गली से यकुम जनवरी
General Poetry
नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से गुज़रना नहीं अब तुम्हारी गली से यकुम जनवरी
पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था,
नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा, बदलना है तो
नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है दीवाना है दीवाने के मुँह न लगो
सफ़र ए मंज़िल ए शब याद नहीं लोग रुख़्सत हुए कब याद नहीं, अव्वलीं क़ुर्ब की सरशारी में
गली गली मेरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल मुझ से इतनी वहशत है तो मेरी
मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है, मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा
फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आए, फिर
क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ
कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं इस गली में तो पत्थर ही ले