देख मोहब्बत का दस्तूर

dekh mohabbat ka dastoor

देख मोहब्बत का दस्तूर तू मुझ से मैं तुझ से दूर, तन्हा तन्हा फिरते हैं दिल वीराँ आँखें

तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें

tum aa gaye ho to kyun intizar e sham karen

तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें कहो तो क्यूँ न अभी से कुछ एहतिमाम

शहर सुनसान है किधर जाएँ

shahar sunsan hai kidhar jaayen

शहर सुनसान है किधर जाएँ ख़ाक हो कर कहीं बिखर जाएँ रात कितनी गुज़र गई लेकिन इतनी हिम्मत

गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने

girafta dil hai bahut aaj tere deewane

गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें

तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है

taar e shabnam kee tarah soorat e khas tutati hai

तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है आस बँधने नहीं पाती है कि बस टूटती

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है

khwab me manzar rah jaata hai

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है तकिए पर सर रह जाता है, आ पड़ती है झील आँखों में

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर

umr bhar chalte rahe hum waqt kee talwar par

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर,

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे

kashtee havas hawaaon ke rukh par utaar de

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए होऊँ से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में

raqs karne ka mila huqm jo dariyaaon me

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में हम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिए पाँव में,

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

jis taraf chahoon pahunch jaaoon masafat kaisi

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों