कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने

kahin be khyaal ho kar yunhi choo liya kisi ne

कहीं बे ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने कई ख़्वाब देख डाले यहाँ मेरी बे ख़ुदी

आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से

aa nikal ke maidaan me do rukhi ke khaane se

आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से काम चल नहीं सकता अब किसी बहाने से,

अल्फाज़ के झूठे बंधन में

alfaz ke jhuthe bandhan me

अल्फाज़ के झूठे बंधन में आगाज़ के गहरे परों में हर शख्स मुहब्बत करता है, हालाकिं मुहब्बत कुछ

सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं

soo e maqtal ki paye sair e chaman jaate hain

सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं अहल ए दिल जाम ब कफ़ सर ब

गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है

go raat meri subah kee marham to nahin hai

गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है सूरज से तेरा रंग ए हिना कम तो नहीं

निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने

nigaah e saaqi e na meharbaan ye kya jaane

निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने कि टूट जाते हैं ख़ुद दिल के साथ पैमाने,

तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी

taqdeer ka shikwa be maanee

तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं, आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो

उठाए जा उन के सितम और जिए जा

uthaye jaa un ke sitam aur jiye jaa

उठाए जा उन के सितम और जिए जा यूँ ही मुस्कुराए जा आँसू पिए जा, यही है मोहब्बत

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें

ab ahal e dard ye jeene ka ehtimam karen

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें,

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ

dushman kee dosti hai ab ahal e watan ke saath

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के