लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से
लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों
Life Status
लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों
लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं चराग़ बाम से जिस को उतर के
ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से
आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना
जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ
शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई उसे तो आना था हर हाल में चली आई,
जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव पड़ते नहीं ज़मीन पे अब इस
है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए, आप गर
जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे, मैं ने एक फ़स्ल
क्या अंधेरा है क्या उजाला है ये नज़रिये का बस हवाला है, रंग बस एक ही है दुनिया