लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से

lahoo rago me sambhaala nahi gaya mujh se

लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों

लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं

lahoo me rang e sukhan us ka bhar ke dekhte hain

लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं चराग़ बाम से जिस को उतर के

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे 

khyaal tha ki tujhe paa ke khud ko dhoondhenge

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था

aakhir gam e jaanaan ko ae dil badh kar gam e dauraan hona tha

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना

जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते

jo samjhaate bhi aa kar vaaieez e barham to kya karte

जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ

शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई

shigaaf e khana e dil se hi raushni aayi

शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई उसे तो आना था हर हाल में चली आई,

जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव

jab shahar e dil me pad gaye us zar badan ke paanv

जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव पड़ते नहीं ज़मीन पे अब इस

है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए

hai khushi se kis tarah gam ka khasaara dekhiye

है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए, आप गर

जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे

jungalon me jo khuda titliyan mahfooz rakhe

जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे, मैं ने एक फ़स्ल

क्या अंधेरा है क्या उजाला है

kya andhera hai kya ujala hai

क्या अंधेरा है क्या उजाला है ये नज़रिये का बस हवाला है, रंग बस एक ही है दुनिया