अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे
अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे जो अर्ज़ ए हाल ब तर्ज़ ए निगाह ए
Life Status
अदा ए तूल ए सुख़न क्या वो इख़्तियार करे जो अर्ज़ ए हाल ब तर्ज़ ए निगाह ए
वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए दामन पे रंग ए पैरहन ए यार देखिए, दिखला
डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, जमाल
सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी तेरे आँचल की मेहमानी, सहज सहज उस हुस्न का चलना उस पे अंधी शब
कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने हरम सरा से बुलाया हमें वतन अपने, खुले गले की क़मीसें
कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो किसी भी अप्सरा से गुफ़्तुगू न हो, क़ज़ा हुआ है
दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं जीवन ख़ुश बख़्त हुआ ही नहीं, इसे तोड़ना भी तो नर्मी
सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में उलझनें कितनी हैं इस इश्क़ की आसानी में, ये तेरे बालों का
ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं का’बा ए इश्क़ नहीं रौज़ा ए यक ख़्वाब नहीं, एक
सर को आवाज़ से वहशत ही सही और वहशत में अज़िय्यत ही सही, ख़ाक ज़ादी तेरे उश्शाक़ बहुत