हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे

humen shuoor e junoon hai ki jis chaman me rahen

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे,

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है

mujh se kaha jibreel e junoon ne ye bhi vahee ilaahi hai

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए

रहते थे कभी जिन के दिल में हम

rahte the kabhi jin ke dil me hum

रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे हैं उन्ही के

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते

masarraton ko ye ahal e havas na kho dete

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो

शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं

shaam e gam kee qasam aaj gamgeen hain

शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम,

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें

ye ruke ruke se aansoon ye dabi dabi see aahen

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें,

किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे

kisi ne bhi to na dekha nigaah bhar ke mujhe

किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे गया फिर आज का दिन भी उदास कर

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए

mujhe sahal ho gayi manzilen wo hawa ke rukh bhi badal gaye

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए तेरा हाथ हाथ में आ गया

आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख

aah e jaan soz kee mahrumi e taasir na dekh

आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख हो ही जाएगी कोई जीने की तदबीर न

ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो

ae dil mujhe aisi jagah le chal jahan koi na ho

ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न