पेश जो आया सर ए साहिल ए शब बतलाया

pesh aaya sar e sahil e shab batlaya

पेश जो आया सर ए साहिल ए शब बतलाया मौज ए ग़म को भी मगर मौज ए तरब

हर नई शाम सुहानी तो नहीं होती है

har nayi shaam suhani to nahi hoti

हर नई शाम सुहानी तो नहीं होती है और हर उम्र जवानी तो नहीं होती है, तुम ने

किसी की क़ैद से आज़ाद हो के रह गए हैं

kisi ki qaid se aazad ho ke rah gaye hai

किसी की क़ैद से आज़ाद हो के रह गए हैं तबाह हो गए बर्बाद हो के रह गए

सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की

suni hai chaap bahut waqt ke gujrne kee

सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिस के भरने की,

घूम फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे

ghoom fir kar isi kooche kee taraf

घूम फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे दिल से निकले भी अगर हम तो कहाँ जाएँगे ?

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है

fayada kya hai hame aur khasaara kya hai

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है जो भी है आप का सब कुछ है हमारा क्या

निकल पड़े हैं सनम रात के शिवाले से

nikal pade hain sanam raat ke

निकल पड़े हैं सनम रात के शिवाले से कुछ आज शहर ए ग़रीबाँ में हैं उजाले से, चलो

बचाओ दामन ए दिल ऐसे हमनशीनों से

bachaao daaman e dil aise hamnashino se

बचाओ दामन ए दिल ऐसे हमनशीनों से मिला के हाथ जो डसते हैं आस्तीनों से, निगार ए वक़्त

पी ले जो लहू दिल का वो इश्क़ की मस्ती है

pee le jo lahoo dil ka wo ishq

पी ले जो लहू दिल का वो इश्क़ की मस्ती है क्या मस्त है ये नागन अपने ही

ज़हर को मय दिल ए सद पारा को मीना न कहो

zahar ko may dil e sad paara ko

ज़हर को मय दिल ए सद पारा को मीना न कहो दौर ऐसा है कि पीने को भी