जब ज़रा तेज़ हवा होती है

jab zara tez hawa hoti hai

जब ज़रा तेज़ हवा होती है कैसी सुनसान फ़ज़ा होती है, हम ने देखे हैं वो सन्नाटे भी

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा

sar me jab ishq ka sauda na raha

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा क्या कहें ज़ीस्त में क्या क्या न रहा, अब तो

कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत

kal jinehn zindagi thee raas bahut

कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत आज देखा उन्हें उदास बहुत, रफ़्तगाँ का निशाँ नहीं मिलता एक रही

दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे

dard kam hone laga aao ki kuch raat kate

दर्द कम होने लगा आओ कि कुछ रात कटे ग़म की मीआ’द बढ़ा जाओ कि कुछ रात कटे,

यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए

yun tere husn kee tasveer gazal me aaye

यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए जैसे बिल्क़ीस सुलेमाँ के महल में आए, जब्र से एक

तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं

tere milne ko bekal ho gaye hain

तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं मगर ये लोग पागल हो गए हैं, बहारें ले के आए

कब तलक मुद्दआ कहे कोई

kab talak muddaa kahe koee

कब तलक मुद्दआ कहे कोई न सुनो तुम तो क्या कहे कोई ? ग़ैरत ए इश्क़ को क़ुबूल

अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को

avvalee chaand ne kya baat sujhaaee mujh ko

अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को याद आई तेरी अंगुश्त ए हिनाई मुझ को, सर ए

कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले

kuch to ehsas e ziyaan tha pahle

कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले दिल का ये हाल कहाँ था पहले, अब तो झोंके से

याद आता है रोज़ ओ शब कोई

yaad aata hai roz o shab koi

याद आता है रोज़ ओ शब कोई हम से रूठा है बे सबब कोई, लब ए जू छाँव