सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें

subah ke dard ko

सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें किस के घर जाएँ कि इस वादा शिकन को

बेकसी हद से जब गुज़र जाए

bekasi had se jab

बेकसी हद से जब गुज़र जाए कोई ऐ दिल जिए की मर जाए, ज़िंदगी से कहो दुल्हन बन

मौज ए गुल मौज ए सबा मौज ए सहर लगती है

mauj e gul mauj

मौज ए गुल मौज ए सबा मौज ए सहर लगती है सर से पा तक वो समाँ है

मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया

muddat hui us jaan

मुद्दत हुई उस जान ए हया ने हमसे ये इक़रार किया जितने भी बदनाम हुए हम उतना उसने

दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा

dida o dil me

दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा लाख पर्दों में छुपा कोई सँवरता ही रहा, रौशनी

लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम

laakh aawara sahi shahron

लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम लाश ये किस की लिए फिरते हैं इन हाथों पे

आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर

aaye kya kya yaad

आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर उस का काग़ज़ चिपका देना घर के रौशनदानों

तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो

tum pe kya beet

तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो मैं कोई ग़ैर नहीं हूँ कि छुपाओ यारो, इन

हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने

hausla kho na diya

हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने कितनी शिकनों को चुना तेरी जबीं से हम ने,

हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे

har ek rooh me

हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे ये ज़िंदगी तो कोई बददुआ लगे है मुझे,