जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं
जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं,
Gazals
जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं,
नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है,
कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत,
अपनी आँखें हैं और तुम्हारे ख़्वाब कितने पुर कैफ़ हैं हमारे ख़्वाब, उन के हक़ में बड़ा सहारा
जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग क्या से क्या हो जाते हैं अक्सर जाने पहचाने
दिल में मेरे अरमान बहुत हैं इस घर में मेहमान बहुत हैं, आप ज़माने को क्या जानें आप
ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना किसी कमज़र्फ़ से यारी न करना, अगर तुम शाद रहना चाहते
क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है हम किसी के साथ हैं और दिल किसी के
खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें, सुकूत छाया
हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता दीवार से भौंचाल को रोका नहीं जाता, दावों की